गो माता की रक्षा करे।
पद्म पुराण में कहा गया है –
गौ को अपने प्राणों के समान समझे, उसके शरीर को अपने ही शरीर के तुल्य माने, जो गौ के शरीर में सफ़ेद और रंग-बिरंगी रचना करके, काजल, पुष्प, और तेल के द्वारा उनकी पूजा करते है, वह अक्षय स्वर्ग का सुख भोगते है.
जो प्रतिदिन दूसरे की गाय को मुठ्ठी भर घास देता है, उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है जैसे ब्राहमण का महत्व है, वैसे ही गौ का महत्व है, दोनों की पूजा का फल एक समान है.
भगवान के मुख से अग्नि, ब्राह्मण, देवता और गौ - ये चारो उत्पन्न हुए इसलिए ये चारो ही इस जगत के जन्मदाता है .
गौ सब कार्यों में उदार तथा समस्त गुणों की खान है .गौ की प्रत्येक वस्तु पावन है, गौ का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी, इन्हे "पंचगव्य" कहते है इनका पान कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता और जिसे गाय का दूध दही खाने नहीं मिलता उसका शरीर मल के समान है.
" घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवा:.
घृतनघो घ्रातावर्त्तास्ता में सन्तु सदा गृह ।
वन्दे गौमात्रम
www.facebook.com/ r.jbhartiya
पद्म पुराण में कहा गया है –
गौ को अपने प्राणों के समान समझे, उसके शरीर को अपने ही शरीर के तुल्य माने, जो गौ के शरीर में सफ़ेद और रंग-बिरंगी रचना करके, काजल, पुष्प, और तेल के द्वारा उनकी पूजा करते है, वह अक्षय स्वर्ग का सुख भोगते है.
जो प्रतिदिन दूसरे की गाय को मुठ्ठी भर घास देता है, उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है जैसे ब्राहमण का महत्व है, वैसे ही गौ का महत्व है, दोनों की पूजा का फल एक समान है.
भगवान के मुख से अग्नि, ब्राह्मण, देवता और गौ - ये चारो उत्पन्न हुए इसलिए ये चारो ही इस जगत के जन्मदाता है .
गौ सब कार्यों में उदार तथा समस्त गुणों की खान है .गौ की प्रत्येक वस्तु पावन है, गौ का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी, इन्हे "पंचगव्य" कहते है इनका पान कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता और जिसे गाय का दूध दही खाने नहीं मिलता उसका शरीर मल के समान है.
" घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवा:.
घृतनघो घ्रातावर्त्तास्ता में सन्तु सदा गृह ।
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