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मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी..
यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था.. मोहनदास करमचन्द के अनुसार l
1966 और 1971 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हरियाणा और हिमाचल प्रदेश पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के
बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे उन्होंने फिर से मांग की...
की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान (आधुनिक बांग्लादेश) जाने में
बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं...
पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर
जाना पड़ता है l और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए कुछ मांगें रखी गयीं:-
1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए..
2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो (NH– 1)
3. जो दिल्ली के पास से जाता हो …
4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM)
5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l
30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3
फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा l
तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात
सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय
भी नहीं था जिसके कारण
हुतात्मा नाथूराम गोडसे
जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और
शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l
परन्तु ….. अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास
करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30
जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l 10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गएl
¤हरि: ॐ¤
जय महाकाल.!!!
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