Monday, 6 October 2014

भारत को यूरेनियम देने को तैयार आस्ट्रेलिया


मेलबर्न। आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने कहा है कि उनकी योजना भारत के साथ एक नाभिकीय समझौते पर हस्ताक्षर करने की है, जिसके बाद आस्ट्रेलिया, भारत को यूरेनियम बेच सकेगा। एबॉट की अगले सप्ताह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होनी है।
भारत के तीन दिवसीय दौरे से पहले एबॉट ने संसद में उम्मीद जताई कि उनके भारत दौरे से खनन, वित्त और शिक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे। उन्होंने कहा कि यूरेनियम बेचने पर समझौता होने से भारत को अपनी बिजली की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। एक दिन पहले एबॉट ने कहा था कि अगर आस्ट्रेलिया, रूस को यूरेनियम बेचने को तैयार हो सकता है तो निश्चित तौर पर नियमों के तहत हम भारत को भी यूरेनियम बेचने को तैयार हैं। हालांकि भारत ने अभी तक परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस पर एबॉट ने कहा कि आस्ट्रेलिया समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले यह सुनिश्चित करेगा कि इसमें सुरक्षा के पर्याप्त उपायों का समावेश हो। उन्होंने इसकी भी घोषणा की कि आस्ट्रेलिया अब रूस को यूरेनियम बेचना जारी नहीं रखेगा।
भारत के साथ समझौते के बाद 2018 तक दोनों देशों के बीच सालाना निर्यात दोगुना होने की उम्मीद है। आस्ट्रेलिया में दुनिया के एक तिहाई यूरेनियम के स्रोत हैं, यह सालाना सात हजार टन यूरेनियम का निर्यात करता है। 2012 में लेबर पार्टी की सरकार ने भारत के परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने के चलते उसे यूरेनियम बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। भारत, आस्ट्रेलिया का पांचवां सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। भारत में उसका कुल निर्यात 11.4 बिलियन डालर का है।
http://www.jagran.com/news/world-aus-ready-to-ink-uranium-export-deal-with-india-abbott-11602378.html

गो माता की रक्षा करे।



गो माता की रक्षा करे।

पद्म पुराण में कहा गया है –

गौ को अपने प्राणों के समान समझे, उसके शरीर को अपने ही शरीर के तुल्य माने, जो गौ के शरीर में सफ़ेद और रंग-बिरंगी रचना करके, काजल, पुष्प, और तेल के द्वारा उनकी पूजा करते है, वह अक्षय स्वर्ग का सुख भोगते है.

जो प्रतिदिन दूसरे की गाय को मुठ्ठी भर घास देता है, उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है जैसे ब्राहमण का महत्व है, वैसे ही गौ का महत्व है, दोनों की पूजा का फल एक समान है.

भगवान के मुख से अग्नि, ब्राह्मण, देवता और गौ - ये चारो उत्पन्न हुए इसलिए ये चारो ही इस जगत के जन्मदाता है .

गौ सब कार्यों में उदार तथा समस्त गुणों की खान है .गौ की प्रत्येक वस्तु पावन है, गौ का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी, इन्हे "पंचगव्य" कहते है इनका पान कर लेने से शरीर के भीतर पाप नहीं ठहरता और जिसे गाय का दूध दही खाने नहीं मिलता उसका शरीर मल के समान है.

" घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवा:.
घृतनघो घ्रातावर्त्तास्ता में सन्तु सदा गृह ।

वन्दे गौमात्रम

www.facebook.com/r.jbhartiya

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गैस सिलेण्डर की भी होती है एक्‍सपायरी डेट !!! जी ! हां ! घरेलू गैस सिलेण्डर की भी एक्सपायरी डेट होती है और एक्सपायरी डेट निकलने के बाद गैस सिलेण्डर को इस्तेमाल करना बम की तरह खरतनाक हो सकता है। आमतौर पर गैस सिलेण्डर की रिफील लेते समय उपभोक्ताओं का ध्यान इसके वजन और सील पर ही होता है। उन्हें सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट की जानकारी ही नहीं होती। इसी का फायदा एलपीजी की आपूर्ति करने वाली कंपनियां उठाती हैं और धड़ल्ले से एक्पायरी डेट वाले सिलेण्डर रिफील कर हमारे घरों तक पहुंचाती हैं। यहीं कारण है कि गैस सिलेण्डरों से हादसे होते हैं। कैसे पता करें#एक्सपायरी डेट सिलेण्डर के उपरी भाग पर उसे पकड़ने के लिए गोल रिंग होती है और इसके नीचे तीन पट्टियों में से एक पर काले रंग से सिलेण्डर की एक्सपायरी डेट अंकित होती है। इसके तहत अंग्रेजी में ए, बी, सी तथा डी अक्षर अंकित होते है तथा साथ में दो अंक लिखे होते हैं। ए अक्षर साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च), बी साल की दूसरी तिमाही (अप्रेल से जून), सी साल की तीसरी तिमाही (जुलाई से सितम्बर) तथा डी साल की चौथी तिमाही अर्थात अक्टूबर से दिसंबर को दर्शाते हैं। इसके बाद लिखे हुए दो अंक एक्सपायरी वर्ष को संकेत करते हैं। यानि यदि सिलेण्डर पर डी 09 लिखा हुआ हो तो सिलेण्डर की एक्सपायरी दिसंबर 2009 है। इस सिलेण्डर का # दिसम् ‍बर 2009 के बाद उपयोग करना खतरनाक होता है। इस प्रकार के सिलेण्डर बम की तरह कभी भी फट सकते हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे इस प्रकार के एक्सपायर सिलेण्डरों को लेने से मना कर दें तथा आपूर्तिकर्त्ता एजेंसी को इस बारे में सूचित करें। (साभार इवनिंग प्लस) आईये ! देखते है ! कहा ?????...लिखी होती है !...एक्सपायरी डेट !!! नीचे के दोनों सिलेण्डरों में से एक में ए 11 तथा दूसरे में ए बी अंकित किया हुआ है !!!...अर्थात ?????...
पहला सिलेण्डर मार्च 2011 में तथा दूसरा मार्च 2020 में एक्सपायर होने वाला है !!!!


https://www.facebook.com/photo.php?fbid=723907844330644&set=a.361305610590871.96577.100001343045957&type=1&permPage=1

भारत लौटी चोरी गई प्राचीन शिव मूर्तियां

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री नाभिकीय आपूर्ति करार के साथ ही एक पुरानी भूल का सुधार भी कर गए। प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने तस्करी कर भारत से बाहर ले जाई गई दो प्राचीन शिव मूर्तियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वापस सौंपी।
आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के इस कदम को खासा अहम बताते हुए मोदी ने कहा कि इसके लिए मैं भारत के सभी लोगों की ओर से धन्यवाद देता हूं। आस्ट्रेलिया ने हमारी संपत्ति ही नहीं संस्कृति और सम्मान का भी ध्यान रखा है।
द्विपक्षीय मुलाकात की मेज पर मोदी ने अपने संवाद की शुरुआत ही 11वीं और 12वीं सदी की इन मूर्तियों के लौटाए जाने पर शुक्रिया अदा करने के साथ किया। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री एबॉट के इस कदम ने भारतीयों का दिल छू लिया है। भारत की शिकायत के बाद ऑस्ट्रेलिया की केनबरा स्थित नेशनल आर्ट गैलरी और सिडनी की आर्ट गैलरी में रखी नटराज और अर्धनारीश्वर की मूर्तियों को लौटाया गया है। मेहमान प्रधानमंत्री ने यह संकल्प भी जताया कि ऑस्ट्रेलिया कभी भी गलत तरीके से हासिल उत्पादों का खरीदार नहीं बनेगा। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु से तस्करी कर ले जाई गई इन मूर्तियों को ऑस्ट्रेलिया सरकार को बेच दिया गया था।
इस मामले को लेकर भारत ने अपने उच्चायोग के जरिये आस्ट्रेलिया से शिकायत की थी। जिसके बाद आर्ट गैलरी से इन्हें हटा दिया गया। सूत्रों के मुताबिक चोरी गई छह मूर्तियों में से अभी केवल दो ही लौट पाई हैं। हालांकि अन्य मूर्तियों के लौटने का रास्ता जरूर साफ हो गया है।

http://www.jagran.com/news/national-australian-pm-returns-11th-century-stolen-idols-to-modi-11608791.html

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मोहनदास करमचन्द ने तो यहाँ तक कहा था की पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाना चाहिए, बहुत कम लोगों को ज्ञात है की 1947 के समय में पंजाब की सीमा दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र तक होती थी..
यानी की पाकिस्तान का बोर्डर दिल्ली के साथ होना तय था.. मोहनदास करमचन्द के अनुसार l
1966 और 1971 में पंजाब में से दो नये राज्यों का उदय हुआ .. हरियाणा और हिमाचल प्रदेश पाकिस्तान जैसा मुस्लिम राष्ट्र पाने के
बाद भी जिन्ना और मुस्लिम लीग चैन से नहीं बैठे उन्होंने फिर से मांग की...
की हमको पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान (आधुनिक बांग्लादेश) जाने में
बहुत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं...
पानी के रास्ते बहुत लम्बा सफर हो जाता है क्योंकि श्री लंका के रस्ते से घूम कर
जाना पड़ता है l और हवाई जहाज से यात्राएं करने में अभी पाकिस्तान के मुसलमान सक्षम नही हैं l इसलिए कुछ मांगें रखी गयीं:-
1. इसलिए हमको भारत के बीचो बीच एक Corridor बना कर दिया जाए..
2. जो लाहोर से ढाका तक जाता हो (NH– 1)
3. जो दिल्ली के पास से जाता हो …
4. जिसकी चौड़ाई कम से कम 10 मील की हो … (10 Miles = 16 KM)
5. इस पूरे Corridor में केवल मुस्लिम लोग ही रहेंगे l
30 जनवरी को गांधी वध यदि न होता, तो तत्कालीन परिस्थितियों में बच्चा बच्चा यह जानता था की यदि मोहनदास करमचन्द 3
फरवरी, 1948 को पाकिस्तान पहुँच गया तो इस मांग को भी …मान लिया जायेगा l
तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार तो मोहनदास करमचन्द किसी की बात
सुनने की स्थिति में था न ही समझने में …और समय
भी नहीं था जिसके कारण
हुतात्मा नाथूराम गोडसे
जी को गांधी वध जैसा अत्यधिक साहसी और
शौर्यतापूर्ण निर्णय लेना पडा l
परन्तु ….. अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले मोहनदास
करमचन्द के कुछ अहिंसक आतंकवादियों ने 30
जनवरी, 1948 की रात को ही पुणे में 6000 ब्राह्मणों को चुन चुन कर घर से निकाल निकाल कर जिन्दा जलाया l 10000 से ज्यादा ब्राह्मणों के घर और दुकानें जलाए गएl
¤हरि: ॐ¤
जय महाकाल.!!!

इंदिरा गाँधी का असली नाम





इंदिरा गाँधी का असली नाम मेमुना बेगम है अब ईस कहानी पे थोड़ी सी रोशनी डालता हूँ आप लोगो ईसे शेर करना ना भूले ............ इंदिरा गाँधी कुछ कडवी हकीकत से मैं भी आज आपको रूबरू करवाता हूँ !!! इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू राजवंश में अनैतिकता को नयी ऊँचाई पर पहुचाया. बौद्धिक इंदिरा को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था लेकिन वहाँ से जल्दी ही पढाई में खराब प्रदर्शन के कारण बाहर निकाल दी गयी. उसके बाद उनको शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था, लेकिन गुरु देव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें उसके दुराचरण के लिए बाहर कर दिया. शान्तिनिकेतन से बहार निकाल जाने के बाद इंदिरा अकेली हो गयी. राजनीतिज्ञ के रूप में पिता राजनीति के साथ व्यस्त था और मां तपेदिक के स्विट्जरलैंड में मर रही थी. उनके इस अकेलेपन का फायदा फ़िरोज़ खान नाम के व्यापारी ने उठाया. फ़िरोज़ खान मोतीलाल नेहरु के घर पे मेहेंगी विदेशी शराब की आपूर्ति किया करता था. फ़िरोज़ खान और इंदिरा के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए. महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल डा. श्री प्रकाश नेहरू ने चेतावनी दी, कि फिरोज खान के साथ अवैध संबंध बना रहा था.
फिरोज खान इंग्लैंड में तो था और इंदिरा के प्रति उसकी बहुत सहानुभूति थी. जल्द ही वह अपने धर्म का त्याग कर,एक मुस्लिम महिला बनीं और लंदन केएक मस्जिद में फिरोज खान से उसकी शादी हो गयी. इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू ने नया नाम मैमुना बेगम रख लिया. उनकी मां कमला नेहरू इस शादी से काफी नाराज़ थी जिसके कारण उनकी तबियत और ज्यादा बिगड़ गयी. नेहरू भी इस धर्म रूपांतरण से खुश नहीं थे क्युकी इससे इंदिरा के प्रधानमंत्री बन्ने की सम्भावना खतरे में आ गयी. तो, नेहरू ने युवा फिरोज खान से कहा कि अपना उपनाम खान से गांधी कर लो. परन्तु इसका इस्लाम से हिंदू धर्म में परिवर्तन के साथ कोई लेना - देना नहीं था. यह सिर्फ एक शपथ पत्र द्वारा नाम परिवर्तन का एक मामला था. और फिरोज खान फिरोज गांधी बन गया है, हालांकि यह बिस्मिल्लाह शर्मा की तरह एक असंगत नाम है. दोनों ने ही भारत की जनता को मूर्ख बनाने के लिए नाम बदला था. जब वे भारत लौटे, एक नकली वैदिक विवाह जनता के उपभोग के लिए स्थापित किया गया था.
इस प्रकार, इंदिरा और उसके वंश को काल्पनिक नाम गांधी मिला. नेहरू और गांधी दोनों फैंसी नाम हैं. जैसे एक गिरगिट अपना रंग बदलती है, वैसे ही इन लोगो ने अपनीअसली पहचान छुपाने के लिए नाम बदले. . के.एन. राव की पुस्तक "नेहरू राजवंश" (10: 8186092005 ISBN) में यह स्पष्ट रूप से लिखा गया है संजय गांधी फ़िरोज़ गांधी का पुत्र नहीं था, जिसकी पुष्टि के लिए उस पुस्तक में अनेक तथ्यों कोसामने रखा गया है. उसमे यह साफ़ तौर पे लिखा हुआ है की संजय गाँधी एक और मुस्लिम मोहम्मद यूनुस नामक सज्जन का बेटा था. दिलचस्प बात यह है की एक सिख लड़की मेनका का विवाह भी संजय गाँधी के साथ मोहम्मद यूनुस के घरमें ही हुआ था. मोहम्मद यूनुस ही वह व्यक्ति था जो संजय गाँधी की विमान दुर्घटना के बाद सबसे ज्यादा रोया था. 'यूनुस की पुस्तक "व्यक्ति जुनून और राजनीति" (persons passions and politics )(ISBN-10: 0706910176) में साफ़ लिखा हुआ है की संजय गाँधी के जन्म के बाद उनका खतना पूरे मुस्लिम रीति रिवाज़ के साथ किया गया था. कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक "the life of Indira Nehru Gandhi (ISBN: 9780007259304) में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला है. यह लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्तिनिकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था. बाद में वह एमओ मथाई, (पिता के सचिव) धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उनके योग शिक्षक) के साथ और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई.पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंदिरा गांधी के मुगलों के लिए संबंध के बारे में एक दिलचस्परहस्योद्घाटन किया अपनी पुस्तक "profiles and letters " (ISBN: 8129102358 ) में किया. यह कहा गया है कि 1968 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री के रूप में अफगानिस्तान की सरकारी यात्रा पर गयी थी .
नटवरसिंह एक आईएफएस अधिकारी के रूप में इस दौरे पे गए थे. दिन भर के कार्यक्रमों के होने के बाद इंदिरा गांधी को शाम में सैर के लिए बाहर जाना था . कार में एक लंबी दूरी जाने के बाद,इंदिरा गांधी बाबर की कब्रगाह के दर्शन करना चाहती थी, हालांकि यह इस यात्रा कार्यक्रम में शामिल नहींकिया गया. अफगान सुरक्षा अधिकारियों ने उनकी इस इच्छा पर आपत्ति जताई पर इंदिरा अपनी जिद पर अड़ी रही . अंत में वह उस कब्रगाह पर गयी . यह एक सुनसान जगहथी. वह बाबर की कब्र पर सर झुका कर आँखें बंद करके कड़ी रही और नटवर सिंह उसके पीछे खड़े थे . जब इंदिरा ने उसकी प्रार्थना समाप्तकर ली तब वह मुड़कर नटवर से बोली "आज मैंने अपने इतिहास को ताज़ा कर लिया (Today we have had our brush with history ". यहाँ आपको यह बता दे की बाबर मुग़ल साम्राज्य का संस्थापक था, और नेहरु खानदान इसी मुग़ल साम्राज्य से उत्पन्न हुआ. इतने सालो से भारतीय जनता इसी धोखे मेंहै की नेहरु एक कश्मीरी पंडित था....जो की सरासर गलत तथ्य है..... इस तरह इन नीचो ने भारत में अपनी जड़े जमाई जो आज एक बहुत बड़े वृक्ष में तब्दील हो गया हैं , जिसकी महत्वाकांक्षी शाखाओ ने माँ भारती को आज बहुत जख्मी कर दिया हैं ,,यह मेरा एक प्रयास हैं आज ,,कि आज इस सोशल मीडिया के माध्यम से ही सही मगर हकीकत से रूबरू करवा सकू !!! ,,,बाकी देश के प्रति यदि आपकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती हो..

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